श्री गोविंद सिंह यादव
प्रवक्ता, मंच शिल्प
इलाहाबाद में जन्मे गोविन्द सिंह यादव ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी
(2001) एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (2006) से रंगमंच का विधिवत् प्रशिक्षण प्राप्त किया।
रंगमंच के प्रारम्भिक दिनों से ही स्थानीय स्तर पर अभिनय, प्रकाश परिकल्पन, कथक नृत्य एवं निर्देशन के प्रति उनका लगाव रहा।
भारतेन्दु नाट्य अकादमी एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का रुख करने के बाद से प्रकाश परिकल्पक,
नाट्य निर्देशक के रूप में रंगमंच की उनकी यात्रा अनवरत् जारी है।
रंगमंच यात्रा में उनके निर्देशन में लोलिता, अंधा युग, आधे-अधूरे, खामोश अदालत जारी है,
कबिरा खड़ा बज़ार में, दुविधा, बल्लभपुर की रूप कथा, दो कौड़ी का खेल, ध्रुवस्वामिनी,
हलालखोर, मिस जूली, शीशे के खिलौने, तानसेन आदि प्रमुख नाटक हैं जिनका मंच
भारत रंग महोत्सव तथा देश के अन्य प्रतिष्ठित नाट्य महोत्सवों में हुआ।
लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अनेक ओ०टी०टी० प्रस्तुतियों की रचना की।
गपशप इनकी एक अनूठी ओ०टी०टी० की प्रस्तुति थी, जिसे इन्होने स्वयं रचा था
और लोगों से जुड़ते हुए 177 एपिसोड संचालित किए थे।
अपनी रचनाशीलता के अभिन्न अंग के रूप में दृश्यबन्ध अभिकल्पना, प्रकाश
अभिकल्पना एवं संगीत में नए आयाम स्थापित करने का उनका उत्साह दुर्लभ है।
शुरुआती दिनों में ही उन्होंने प्रतिष्ठित उर्दू अकादमी के लिए नाटक हलालखोर का निर्देशन किया।
वर्ष 2008 में आपको प्रकाश परिकल्पना के क्षेत्र में
उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी,
नई दिल्ली द्वारा 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार प्रदान किया
एवं प्रकाश अभिकल्पना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय नाट्य
विद्यालय द्वारा सम्मानित वर्ष 2018 में मनोहर सिंह स्मृति पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया।
साथ ही वर्ष 2023 में उन्हें लखनऊ में शिक्षारत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। रंगमंच एवं प्रकाश
तकनीक और अभिकल्पना के उच्च अध्ययन हेतु कोरिया दूतावास द्वारा दक्षिण कोरिया में आपको प्रशिक्षण का
अवसर प्रदान किया गया।
साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से रॉयल अॅकडमी ऑफ ड्रमैटिक आर्ट (RADA)
से अध्ययन कार्यशैली का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे अपनी प्रकाश योजना तकनीकों के लिए जाने जाते है।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, रंगमण्डल, नई दिल्ली, थिएटर इन एजुकेशन स्कन्ध,
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एवं छात्रों की प्रस्तुतियों के साथ ही विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों एवं विद्यालयों
में भी प्रकाश परिकल्पना के नए मानक उन्होंने स्थापित किए। उन्होंने नाट्य प्रस्तुतियों के साथ ही अनेक पुतुल प्रस्तुतियों, शास्त्रीय नृत्य यथा कथक,
कुचीपुड़ी. भरतनाट्यम्, मोहिनीअट्टम् एवं समकालीक नृत्यों में प्रकाश परिकल्पना की है। उन्होंने अनेक शास्त्रीय संगीत एवं समसामयिक प्रदर्शनों में
भी प्रकाश परिकल्पना की है। लगभग एक हजार से भी अधिक राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय मंच प्रदर्शनों की प्रकाश परिकल्पना एवं व्यवस्था का निर्वाह करते हुए।
लंदन, सिंगापुर, जिम्बाब्वे, इजिप्ट, बैंकॉक, थाईलैण्ड, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया,
कम्बोडिया, लाओस, मॉस्को, शुची, ब्लादिवास्ता इत्यादि देशों में प्रकाश परिकल्पक के रूप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
रंग शिक्षाविद् अकादमी में आने से पूर्व वे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली में प्रकाश परिकल्पक के पद पर छः वर्ष तक शासकीय सेवा में थे।
वर्तमान में वे भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ में मंच शिल्प प्रवक्ता के रूप में कार्यरत् हैं।
मनोज कुमार मिश्रा
प्रवक्ता, मंच शिल्प
मनोज कुमार मिश्रा 26 मई 1980 को रीवा मध्यप्रदेश में हुआ था और बचपन से ही
अल्पायु में उन्होंने रंगमंच पर कार्य करते हुए स्वयं को परिपक्व किया। मंच परिकल्पना,
प्रकाश परिकल्पना, वेशभूषा, मुखौटा निर्माण में आपकी विशेष रुचि रही। नाट्य विधा में
मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय विजेता दल के सदस्य रहे।
उन्होंने पद्मश्री शम्भू हेगड़े जी के सान्निध्य में यक्षगान का विधिवत् प्रशिक्षण प्राप्त किया।
साथ ही लोक तत्व, अभिनय एवं निर्देशन की बारीकियाँ अलखनन्दन
जी के सान्निध्य में सीखते हुए भारतेन्दु नाट्य अकादमी लखनऊ से
रंगमंच का विधिवत् द्विवर्षीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। तदोपरांत उनका
चयन अकादमी में ही एक वर्षीय इंटर्नशिप के लिए हुआ। उन्होंने फिल्म एवं
टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से विस्तृत प्रशिक्षण एवं फिल्म अप्रीशीएशन पाठ्यक्रम पूर्ण किया।
वे मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केन्द्र के निदेशक एवं रेनेसाँ थिएटर गया
(बिहार) में तकनीकी निदेशक रहे। उन्हें संस्कृति मंत्रालय,
भारत सरकार द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में जूनियर फैलोशिप प्रदान की गई।
पद्मश्री राज बिसरिया, पद्मश्री रामगोपाल बजाज, पद्मश्री बंसी कौल,
अलखनन्दन, सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, बी. जयश्री, अलोपी वर्मा, प्रोबीर गुहा,
बापी बोस, आलोक चटर्जी आदि प्रसिद्ध नाट्य निर्देशकों के सान्निध्य में
कार्य का प्रचुर अनुभव। उन्होंने 50 नाट्य प्रस्तुतियों में अभिनय, 30 नाटकों की मंच परिकल्पना,
100 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों की प्रकाश परिकल्पना, 20 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों की वेशभूषा
परिकल्पना के साथ ही रूप सज्जा का कार्य भी कुशलता पूर्वक किया है। उन्होंने रीवा, मध्यप्रदेश में गैरेज थिएटर की स्थापना की।
वर्ष 2010 से भारतेन्दु नाट्य अकादमी ने उन्हें अतिथि प्रशिक्षक के रूप
में आमन्त्रित किया एवं प्रवेश समिति के सदस्य के रूप में भी सम्मान प्रदान किया।
मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय की गुणवत्ता कमेटी के सदस्य एवं अतिथि प्रशिक्षक एवं एच
सी आर एफ टी आर, मण्डी, हिमाचल प्रदेश में वे अतिथि प्रशिक्षक रहे।
उन्होंने मध्यप्रदेश नाट्य समारोह, भारत रंग महोत्सव, भारत पर्व,
मण्डप महोत्सव, संस्कृति महोत्सव, देहात लोक रंगपर्व, लोकोत्सव आदि नाट्य समारोहों
में प्रस्तुतियाँ एवं संयोजन कार्य किया है। 8 नाटकों का लेखन एवं 10 नाटकों का रूपान्तरण किया है।
इसके अतिरिक्त उनकी दो पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं। रंगमंच के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों के दृष्टिगत
उन्हें विन्ध्य शिखर सम्मान, मध्यप्रदेश युवा निर्देशक सम्मान, लोक गौरव सम्मान और केन्द्रीय संगीत नाटक
अकादमी द्वारा प्रकाश परिकल्पना के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा सम्मान'
2020 से सम्मानित किया गया। वर्ष 2021 में उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी द्वारा सफदर हशमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डॉ० सुमित कुमार श्रीवास्तव
प्रवक्ता, शास्त्रीय एवं आधुनिक भारतीय रंगमंच
डॉ० सुमित कुमार श्रीवास्तव ने एक दशक से अधिक समय से देश के विभिन्न महानगरों एवं
अंचलों में अनेक नाटकों की प्रस्तुति की है। उन्होंने महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ से बी०ड्रामा
और पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के थिएटर और टेलीविज़न विभाग से परास्नातक किया एवं यहीं बबसे
'नाट्य शास्त्र एवं आधुनिक हिन्दी नाटक' विषय पर पी०एच०डी० (शोध कार्य) किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित
रंग निर्देशकों के साथ कार्य किया है जिनमें देवेन्द्र राज अंकुर, संजय उपाध्याय, प्रो० सुनीता धीर, प्रो० नवनीन्द्र बहल,
केवल धालीवाल, रॉबिन दास, दिनेश खन्ना, प्रो० सत्यव्रत राउत, डॉ० गौतम चटर्जी, पद्मश्री नीलमा मान सिंह,
पद्मश्री बंसी कौल, डॉली अहलूवालिया आदि प्रमुख हैं। उनके द्वारा निर्देशित नाटकों- अंधायुग, चेरी का बागीचा,
गगन दमामा बाज्यो, प्रतिमा, सुनो आम्रपाली, स्पेस, कोरस, स्माइलिंग डेथ, आईना, अवरुद्ध, किंग लियर, सृष्टि
का आखिरी आदमी, आवाज का नीलाम, गजब की हमारी काशी, मालवीय संवाद, गंगा के महामना, महामना दि
कॉन्शेन्सकीपर, मंत्र, मैकू, गेशे जम्पा इत्यादि ने उन्हें राष्ट्रीय रंगमंच पटल पर स्थापित किया है।
शुभदीप राहा
प्रवक्ता, अभिनय संकाय
शुभदीप राहा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली एवं मेट फिल्म स्कूल,
लंदन के पूर्व छात्र एवं समाजशास्त्र में स्नातक हैं और सघन अभ्यास एवं कला-कौशल
के माध्यम से प्रशिक्षण देने में पारंगत हैं। उनके पास देश के तमाम अभिनय प्रशिक्षण
संस्थानों में शिक्षण का लम्बा अनुभव है। उन्होंने टी० सीरीज़ स्टेज वर्क अकादमी, गुवाहाटी में सीईओ
और इसके अभिनय प्रभाग में मार्गदर्शक के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं। इसके अलावा उन्होंने 'ऐन ऐक्टर
प्रिपेयर्स' के अहमदाबाद, चण्डीगढ़ और मुम्बई स्थित केन्द्रों में भी बतौर संकाय प्रमुख एवं अभिनय विशेषज्ञ
अपनी सेवाएँ दी हैं। वे उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्थित प्रख्यात नाट्य विद्यालय भारतेन्दु नाट्य अकादमी से लम्बे
समय तक अतिथि संकाय के रूप में जुड़े रहे और वर्तमान में वर्ष 2021 से नियमित संकाय के रूप में कार्यरत् हैं।
इंदिरा स्कूल ऑफ कॅम्युनिकेशंस ऐक्टिंग अकॉडमी में रचनात्मक निदेशक भी रहे। उन्होंने 08 मौलिक नाटकों का लेखन
किया है जो देश विदेश के कई रंगमहोत्सव में मंचित हुआ है जैसे भारत रंग महोत्सव, काला घोड़ा महोत्सव एवं भारतीय दूतावास लंदन
(Indian Ambassy London) एवं 25 से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है। भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि के
रूप में वे वर्ष 2017 में विश्व थिएटर काँग्रेस में स्पेन का दौरा कर चुके हैं। वर्ष 2024 में उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी
द्वारा सफदर हशमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।